Wanderer's thoughts
Sunday, January 29, 2012
पागल
खूबसूरती को तेरी नज़र अंदाज़ करते हैं ..
और पागलपन का मेरे तमाशा बनाते हैं ..
दीदार-ए-मोहब्बत की गर कीमत यह है..
तो माज़मे के शोर की फ़िक्र किसे है..
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